शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2014

अरे वंदना तुम आज का व्रत क्यों रख रही हो यहअहोई अष्टमी का व्रत तो लड़को के लिए
रखा जाता है, और तुम्हारे तो बेटी हुइ है?
वंदना थोडा सकपकाई फिर( खुद पर मानो गर्व कर
रही हो ) बोली,
तो भाभी ??? स्वस्थ जीवन का हक
केवल लड़को का है क्या? मेरी बेटी ने
मुझे माँ बनने का गौरव दिया, वही शब्द का अधिकार
मिला जो आपके बेटे ने आपको दिया। मैंने
अपनी बेटी को जन्म देने में
उतनी पीड़ा उठाई है
जितनी आपने बेटे को जन्म देने में, तो आज का यह
व्रत केवल लड़को के लिए क्यूँ ?
गर्व है मुझे वंदना जैसी और माहिलाओ पर जो बेटे
या बेटी की नहीं सिर्फ एक
माँ हैं। माँ नारीत्व का सबसे बड़ा सम्मान है, हर
स्त्री को इस सम्मान की गरिमा का ध्यान
रखना चाहिए।

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