करवाचौथ, अच्छा लगता है मुझे यह त्योहार। जीवन के सबसे प्यारे साथी के लिए बेशुमार प्यार। इस बार भी जब यह त्योहार आया तो खुशी मिली, लेकिन पत्रकारिता बुद्धि ने इसके दूसरे पहलू पर नजर डालने पर मजबूर कर ही दिया। घर में मां, चाची, बुआ, दीदी, भाभी ने व्रत रखा सुबह से बिना पानी पिए पति की लम्बी और स्वस्थ उम्र की कामना की, तो ये पति लोग पत्नी की लम्बी उम्र और स्वस्थ जीवन नहीं चाहते क्या? एक पारिवारिक जीवन में जितनी जरूरत एक पुरूष की होती है, उतनी ही आवश्यकता एक महिला की भी होती है। यदि पुरूष परिवार की आजीविका का साधन है, तो महिला की सूझ-बूझ उस आजीविका को सुचारू रूप से सहेज परिवार के भविष्य को संवारती है। ऐसे में मात्र पति की उम्र ही लम्बी हो, इसमें मुझे तर्क नजर नहीं आता। यह त्योहार पुरूष प्रधान त्योहार है। जिससे महिलाएं वर्षों से परंपराओं का हिस्सा मान मनाती चली आ रही हैं। समय के साथ इस परंपरा क ो भी बदलना होगा। यह तभी संभव है, जब पति अपनी पत्नी के लिए करवा चौथ या अन्य कोई निर्जल व्रत रखेंगे।

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