शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

जन-जन रावण, घर-घर लंका...

जन-जन रावण, घर-घर लंका, इतने राम कहां से लाऊं? कुछ ऐसा ही हाल है, शहर में महिलाओं का। कभी घर में तो कभी कार्यस्थल पर किसी ना किसी तरह महिलाओं को पुरुष रूपी रावणों का सामना करना पड़ता है। इज्जत और मजबूरी के चलते अधिकतर महिलाएं अपनी आवाज को दबा तो लेती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इंतजार रहता है कि कोई ना कोई राम आए और उनकी इज्जत के लिए आवाज उठाए और मार गिराए उन तमाम रावणों को जो उनके जैसी ना जाने कितनी सीताओं  की इज्जत पर ताक लगाए बैठे हैं।
शहर में तमाम महिला जागरुकता और सुरक्षा के बाद अभियानों के माध्यम से महिलाएं बाहर की दुनिया में तो सुरक्षित हुई हैं, लेकिन घरों, स्कूल-कॉलेजों एवं आॅफिसों में फैली असुरक्षा का क्या? वुमेन हेल्प लाइन और साइकलॉजी काउंसलिंग सेंटर के  आंकड़ों पर ध्यान दें तो आज हर तीसरे घर में से एक युवती या महिला यौन प्रताड़ना का शिकार हो रही है। सामाजिक दबाव तो कभी आर्थिक मजबूरी के चलते बात को वहीं दबाने की कोशिश में लगी रहती हैं।    
- रोज बढ़ रहे यौन प्रताड़ना के मामले
वुमेन पॉवर हेल्पलाइन के प्रोविजनल अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि यौन प्रताड़ना के मामले अधिकतर युवतियां बताने में कतराती हैं, और बताती भी हैं तो उनकी स्पेशल रिक्वेस्ट रहती है कि घर या आॅफिस में आस-पास किसी को पता नहीं चल पाए। आगरा शहर की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि शहर में प्रताड़नाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन वुमेन पॉवर हेल्पलााइन की मदद से अब अधिक से अधिक युवतियां अपनी समस्या बेझिझक बता देती हैं। पिछले दो महीने के रिकॉर्ड के अनुसार आगरा से लगभग 250 मामले यौन प्रताड़नाओं के दर्ज हुए हैं।
- कभी कानून तो कभी वुमेन हेल्पिंग लाइन देती सहारा
आज के समय में युवतियां और महिलाएं घर से बाहर जाकर हर माहौल से लड़ने को तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर घरों एवं कार्यस्थलों में ही उनके साथ बदसलूकी की परिस्थितियां थम नहीं रही हैं। यही कारण है कि महिलाएं अपना अधिकार समझकर कानून और हेल्पलाइन से सहायता मांगने से नहीं झिझकतीं। एक युवती को विरोध करते देख, प्रताड़ना झेल रही दूसरी युवती भी अपनी आपबीती सुनाने की हिम्मत जुटाने के लिए तैयार हो पाती है।    
- सीता बनने से नहीं चलेगा काम
विजय नगर कॉलोनी निवासी निहारिका गुप्ता(काल्पनिक नाम) बताती हैं कि बचपन से मेरे मामा मेरे साथ गंदीं हरकतें किया करते थे। पहले मम्मी को बताने की कोशिश की लेकिन मम्मी ने मेरी बातों को सही नहंी माना, और कहा कि मुझे गलतफहमी है। उसके बाद बड़े होने पर मामा के आने पर अपने सार्थक प्रयासों के साथ उनसे दूर रहती थी, लेकिन फिर भी वह किसी ना किसी बहाने मेरे पास आकर मेरा शोषण करते थे। लगभग छह महीने पहले मैंने वुमेन पॉवर हेल्प लाइन में अपनी समस्या बताई और उनसे गुजारिश की कि यह मामला मेरे और मामा के बीच में ही रहे, हेल्पलाइन ने पूरा सहयोग किया। मामा ने आकर मुझसे माफी मांगी और कहा कि अब ऐसा कभी कुछ नहीं होगा। आज खुद को बहुत स्वतंत्र महसूस करती हूं। अपनी सहेलियों के समक्ष मैंने अपने साथ घटी घटना को कभी नहीं छिपाया, और यह भी बताती हूं कि किस तरह से मैंने उस समस्या से निजात पाया। ताकि अधिक  से अधिक लड़कियां अपने साथ हो रही प्रताड़नाओं को बता सकें।   

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